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नर्मदेश्वर लक्ष्मी साधना प्रयोग

Sadhu by the Ganges


आज मैं पाठकों को एक दुर्लभ साधना के बारे में बता रहा हूं यह साधना पूर्ण भाव  रखकर की जाती है साधना का नाम नर्मदेश्वर लक्ष्मी साधना है 

भगवान शंकर शक्ति का दूसरा रुप है क्योंकि शिव और शक्ति मिलकर ही पूर्णता बनते हैं अतः शिव की आराधना के माध्यम से लक्ष्मी साधना 

प्रयोग संपन्न किया जाता है नर्मदेश्वर अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण शिवलिंग होता है सुंदर और प्रभावपूर्ण  होता है शिवलिंग मध्य प्रदेश की 

महत्वपूर्ण नदी नर्मदा मैं पाए जाते हैं लेकिन वहां से इन को प्राप्त करना और मंत्र सिद्ध करना इसके साथ प्राणप्रतिष्ठा युक्त करके प्रभाव युक्त 

बनाना मांत्रिक दृष्टि से कठिन कार्य है मेरी राय में ऐसे गृहस्थ  लोग जो अपने जीवन में भोग और मोक्ष की इच्छा रखते हो उन्हें अपने पूजा स्थान 

में ऐसे शिवलिंग की स्थापना अवश्य ही करनी चाहिए साधक को चाहिए कि  किसी भी सोमवार को प्रातः काल सूर्य उदय के समय अपने सामने 

 नर्मदेश्वर शिवलिंग को किसी बर्तन या थाली में स्थापित करें उसके बाद शिवलिंग पर दूध और जल मिलाकर धीरे-धीरे जलधार छोड़ता जाए साथ 

ही साथ नीचे लिखे हुए शिवार्चन चन्द्रिका  लक्ष्मी मंत्रका जप  करता रहे इसमें पानी ज्यादा होना चाहिए और उसका 20 वा हिस्सा दूध का होना 

चाहिए इस प्रकार  दोनों को मिलाकर पहले से ही तैयार रखना चाहिए इसमें मंत्र संख्या निर्धारित नहीं होती परंतु रोज निश्चित समय पर इस  

मंत्र का जाप मन ही मन करता हुआ नर्मदेश्वर शिवलिंग पर दुग्ध मिश्रित जल बराबर डालते रहना चाहिए इस प्रकार चार सोमवार प्रयोग करने से ही 

मनोवांछित सिद्धि प्राप्त हो जाती है और आर्थिक दृष्टि से बहुत अधिक अनुकूलता प्राप्त होने लगती है जो शिव भक्त हैं या जो शीघ्र फल चाहते हैं 

उन्हें इस प्रयोग को जरूर संपन्न करना चाहिए| 
 मंत्र 
ॐ ह्रीं विशाले द्राम द्रूम क्लीम ऐह्येयेहि स्वाहा  || 

जैसा की मैंने बताया इसमें माला का प्रयोग नहीं होता और ना ही गणना करने की कोई आवश्यकता है केवल मात्र मन ही मन 2 घंटे जप करता 

हुआ दुग्ध मिश्रित जल धारा शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए जिससे कि यह प्रयोग पूर्ण संपन्न होता है 2 घंटे समाप्त होने के बाद  जल पवित्र स्थान 

पर डाल देना चाहिए या किसी पेड़ की जड़ में डाल देना चाहिए इस प्रकार यह मात्र चार सोमवार का प्रयोग है आज के कलयुग में जो लोग आर्थिक 

दृष्टि से हताश और निराश हो चुके हैं उन्हें अवश्य ही ऐसा प्रयोग करना चाहिए जिसके माध्यम से आर्थिक स्थिति बहुत ही मजबूत हो जाती है 

और भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है ऐसा प्रयोग इस कलयुग में बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है मुझे भी यह प्रयोग एक उच्च कोटि के साधु 

से प्राप्त हुआ था जिनके बारे में कहा जाता है कि उनका कहा  एक-एक शब्द सरस्वती के गले  से निकले  शब्द के समान है क्योंकि वह अत्यंत  

उच्च कोटि के योगीराज थे उन के किस्से पूरे हिमालय में दूर दूर तक प्रसिद्ध थे वह निरंतर समाज में घूम-घूमकर प्रयोगों को लोगों को देकर  

उनका भला करते थे अतः किसी भी ज्ञान को अपने तक सीमित नहीं रखना चाहिए| 

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