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गुरु गोरखनाथ प्रणीत लक्ष्मी प्रयोग

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1-लक्ष्मी कृपा 

लक्ष्मी का वास अपने भक्तों के यहां ही रहता है और वह अपने जिस भक्तों पर कृपा कर देती हैं वह निहाल हो जाता है और जिस कर्म हीन व्यक्ति पर या भाग्यहीन पर लक्ष्मी की कृपा नहीं होती वह दर दर की ठोकरें खाता है वास्तव में ही तंत्र साधना का सर्वोत्तम स्वरूप है क्योंकि जो कार्य केवल मंत्र के माध्यम से नहीं हो सकते मूल  तंत्र के माध्यम से सहज सरल रूप में संभव हो जाते हैं पूजा के विशेष तरीके को ही तंत्र कहते हैं तंत्र हमेशा शुद्ध रुप से ही किया जाना चाहिए और इसका उद्देश्य भी शुद्ध व पवित्र होना चाहिए तंत्र का मतलब है कि शुद्धतम रूप से शास्त्रोक्त विधि से कार्य का संपादन करना आगे कुछ विशिष्ट प्रयोग बता रहा हूं जो कार्तिक मास में ही संपन्न किए जाते यह प्रयोग बहुत ही सरल हैं और इसमें बहुत बड़ी सफलता छिपी है यह प्रयोग पूर्ण भक्तिभाव से साधक को संपन्न करने चाहिए कार्तिक कृष्ण अमावस्या को ही दीपावली नहीं कहते अपितु पूरे कार्तिक मास को ही लक्ष्मी मां या दीपावली मास कहा गया है कई साधकों ने कार्तिक के 30 दिनों में रोज एक-एक प्रयोग करते हुए 30 प्रयोग संपन्न किए हैं और रंक से राजा बन कर दिखा दिया कि यदि कोई साधक पक्का निश्चय कर ले तो वह अद्वितीय रूप से लक्ष्मी सिद्ध कर सकता है ऐसे बहुत से साधक है जिन्होंने अपने जीवन को साधना कर के पूर्ण रूप से बदला है नीचे कुछ अत्यंत ही दुर्लभ साधना प्रयोग स्पष्ट कर रहा हूं साधकों को चाहिए कि वे इन प्रयोगों को संपन्न करें जिससे कि उन्हें उनके जीवन में अद्वितीय सफलता प्राप्त हो | 
2-मत्स्येंद्रनाथ कृत लक्ष्मी सम्पूर्ण प्रयोग
गुरु मत्स्येंद्रनाथ गोरखनाथ से भी ज्यादा सिद्ध योगी हुए हैं तंत्र के वे साक्षात अवतार थे उन्होंने अपनी संहिता में लक्ष्मी प्रयोग को देकर संसार का महान उपकार  किया हैतंत्र के क्षेत्र में उन्होंने जितना कार्य किया है वह एक अद्वितीय पुरुष ही संपन्न कर सकता है यह प्रयोग कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को इस दिन को अहोई व्यवस्था दिवस के रूप में भी जाना जाता है यह शब्द अष्टलक्ष्मी का अपभ्रंश है सभी साधकों को इस दिन अवश्य ही साधना करनी चाहिए अगर किसी वजह से कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यह साधना ना कर सकें तो हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भी यह साधना की जा सकती है
3-विधान
साधना सुबह उठकर स्नान करके पूजा स्थान में बैठ जाए सामने जलपात्र उनको अक्षत इतिहास रख ले इसके अलावा वरदायक लक्ष्मी गणेश विग्रह स्थापित करें यह  विग्रह यंत्र प्राणतिष्ठा होना चाहिएइसके बाद साधक लक्ष्मी गणेश को जल से स्नान कराकर पहुंच कर पूरे शरीर पर केस लगाए और ओम वरदायक महालक्ष्मी नमः मंत्र से 108 बार पीले रंग के रंगे हुए चावल चढ़ावे इसके बाद मूल प्रयोग को शुरू करें साधक को पहले ही 108 कमल के पुष्प लाकर रख देनी चाहिए इस बात को ध्यान में रखना चाहिए एक भी उस पर ज्यादा ना हो और ना ही कम हो उसके बाद निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए पुष्प चढ़ाएं एक मंत्र बोलें और एक पुष्प चढ़ा दें इस प्रकार क्रम से एक-एक मंत्र पढ़ता हुआ 1-1 पुष्प ह को पर चढ़ाते रहें 

मंत्र 


ॐ  नमो वेताल धरणी गगन बांधू 
आठो  दिशा नवनाथ बांधू
 लक्ष्मी को घर में बांधू 
 व्यापार चढ़े गज तुरंग बढे 
कनक सरे सब सिद्ध होय
 जो होए जो ना होए 
रुद्र को त्रिशूल खंडित होए
 ठम ठमठम || 


जब पूरे 108 पुष्पा लक्ष्मी गणपति विग्रह पर चढ़ा दिए जाएं तो हाथ जोड़कर मां से प्रार्थना करें कि हे  लक्ष्मी मां हे गणपति महाराज मेरे घर में स्थाई रूप से निवास करें और फिर उसी दिन उस विग्रह को अपने पूजा स्थान में रखे  या तिजोरी में रखें या  घर के किसी पवित्र स्थान में  अथवा यदि व्यापार हो या दुकान हो तो वहां भी स्थापित कर सकते हैं | 

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