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जगत जननी केला देवी माँ का दिव्य जागरण

Lo Bhakto Suno Kaila Devi Ki Katha [Full Song] Kaila Maa Kripa Karna ...


जगत जननी मा केला देवी के  दरबार में तारीख 21/4/2017 को 56 भोग का आयोजन श्री नरेंद्र गौतम  और उनकी धर्म पत्नी राजरानी गौतम  व उनके पुत्र अमित ,सुमित ,आसू और उनके परिवार द्वारा आयोजित किया 

गया था  इस दिन माँ की असीम कृपा सभी उपस्थित भक्तो पर ऐसी बरसी जिसे देखकर सभी हर्षातिरेक और  आनंद व ख़ुशी से भाव विभोर होकर मोर के समान न्रत्य करने लगे,  आँखों में आंसू छलछला रहे थे 

और माँ के चरणों को प्रक्षालित कर रहे थे वास्तव में आज सभी भक्तो का सौभाग्य उदित हुआ था  सभी प्रेम की भाषा में मां को  निहारते हुए टकटकी लगाकर देखे जा रहे थे उनकी आंखों से प्रेम के अश्रु किसी झरने की 

तरह लगातार बह रहे थे मां भी अपने भक्तों पर असीम कृपा लुटा रही थी प्रेम के इसी बंधन को प्रेमानंद और दिव्यानंद कहते हैं जब ऐसे  भाव मन में उत्पन्न होते हैं तब हृदय सागर में अनंत लहरें उठने लगती है भगवान  
और भक्त का मिलन हो जाता है आत्मा परमात्मा में विलीन हो जाती है एक नदी सागर में मिल जाती है शरीर का प्रत्येक  रोम-रोम   रोमांचित हो जाता है और उसमे से एक  ही आवाज आती है, हे केला माँ ,हे 

ममतामयी माँ , माँ,माँ,माँ -------,ऐसा ही आनंद  सभी भक्त महसूस कर रहे थे मां के दरबार में दिव्य  कृपा बरस रही थी आज माँ और भक्तो के बीच सभी जन्म- जन्म के बंधन टूट गए थे ऐसा परमानन्द तो स्वर्ग में 

भी प्राप्त नहीं होता ,जिस माँ के आगे सारी  शक्तिया ,सभी देवता हाथ बांधकर  खड़े हो और वह सब मेरी माँ से बहुत कुछ मांगने की आकांक्षा रखते हो तब हम उन देवताओ से क्या मांगे ?फिर हम सीधे ही अपनी माँ से 

क्यों नहीं मांगे जो हमारी सभी इच्छाओ की  पूर्ती करती है मैं भाव विभोर हो जाता हूं मेरा हृदय गदगद हो जाता है आंसुओं की धार बहने  लगती है मेरा गला अवरूद्ध हो जाता है मेरे सांसो की गति बहुत तीव्र हो जाती है मेरे सामने ब्रह्मा विष्णु 

महेश की मूर्ति साकार हो जाती है फिर मैं किस देवता की ओर जाऊं किस देवता की बंदना करूं जब मेरे सामने जगत जननी मां केला देवी साक्षात  दर्शन दे रही है अब मैं और नहीं भटकना चाहता अगर गंगा,यमुना में स्नान करने से मोक्ष मिलता तो 

मछलिया रोज स्नान करती है उन्हें फिर भी मोक्ष नहीं मिल पाता और आज हम सब भक्त धन्य हो गए कि  माँ की कृपा सभी पर हुई है और मां ने भी जागरण का प्रोग्राम शुरू होते ही इसका प्रमाण दे दिया जैसे ही मां का पहला 

भजन शुरू हुआ और एक भक्त ने जैसे ही नाचना शुरू किया  उस भक्त के शरीर में केला देवी माँ प्रवेश कर गई और भक्तों के बीच झूम झूम के नाचने  लगी यह सब देख कर सारे भक्त मां के साथ साथ नाचने लगे 

ऐसा लग रहा था मानो स्वर्ग इस धरती पर उतर आया हो थोड़ी देर बाद जब मां शांत हुई जब उनसे पूछा गया कि मां क्या आप हमारी सेवा से प्रसन्न हैं तो मां ने उत्तर दिया निश्चय ही मैं तुम्हारी सेवा से बहुत प्रसन्न हूं 

यह सब सुनकर सभी भक्तों की आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी उनका हृदय गदगद हो गया पहली बार एहसास हुआ मां के प्रसन्न होने पर उनकी संतान को सच्चा आनंद प्राप्त होता है हम सब जगत जननी की 

संताने  है उनके पुत्र ,पुत्रिया है और अगर संसार में कोई सबसे पवित्र रिश्ता है तो वह है मां और पुत्र का रिश्ता है और केला मैया ही तो हमारी वास्तविक माँ है, हो सकता है कि इस सांसारिक जीवन में   हमारी कोई अन्य 

माँ  हो मगर जिसने सांसारिक जगत की माँ को भी जन्म दिया है वही भगवती  जगत जननी मेरी असली माँ है आज जागरण की रात को मंच पर उपस्थित कलाकारों ने संगीत का ऐसा समा बांधा कि  मां के भजनों को 

सुनकर सभी भक्त भाव विभोर हो गए भजनों से संबंधित कई झांकियां प्रस्तुत की गई जो कि  बड़ी ही मनोहर झांकियां  थी समय का पता ही नहीं चला कि रात कब गुजर गई ऐसा लग रहा था कि अभी तो 5या 10मिनट 

व्यतीत हुए है और  यह कार्यक्रम लगातार चलता रहे इस तह जागरण का program समाप्त हुआ धीरे -धीरे भक्त माँ के चरणों में हाजिरी लगाकर प्रसन्न मुद्रा  में अपने अपने गंतव्य को वापिस रवाना  हुए , बोल केला  
मैया की  जय ,बोल आज के दिव्यानंद ,परमानन्द ,मधुरानंद ,माँतानन्द और प्रेमानन्दकी जय |

हिमालय के योगिराज की  सच्ची घटनाओ पर आधारित stories present by:harikant sharma
website:www.yogichintan.com

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