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परमारथ से बड़ा कोई धर्म नहीं

... ठण्डे पानी की मोबाइल प्याऊ



गर्मियों की बात है, कड़ाके की धूप पड़ रही थी इस वर्ष गर्मी कुछ अधिक ही पडी थी एक यात्री जो कि बहुत दूर से घूमने के उद्देश्य से आया था वह एक गांव से होकर गुजर रहा था, प्यास से व्याकुल था लेकिन उस गांव  मैं 

एक भी कूआ नहीं था आगे जाने पर यात्री ने देखा एक पेड़ के नीचे प्याऊ बनी हुई थी जब वह पास पहुंचा तो उसने पाया कि एक व्यक्ति वहां बैठा हुआ था पूरे शरीर पर वस्त्र के नाम पर एक धोती ही थी उसने यात्री को 

जल पिलाया और पेड़ की छाया में सुस्ता कर तब आगे जाने के लिए कहा दोनों में आपस में बातचीत शुरू हो गई यात्री ने पूछा ,तुम क्या काम करते हो उसने उत्तर दिया मैं तो भैया एक बिना पढ़ा लिखा घास काटने वाला 
व्यक्ति हूं और उस घास को काटकर उसे बाजार में बेच देता हूं उस से जो भी पैसा मिलता है उसी से अपने परिवार की गुजर बसर करता हूं उसी कमाई में से थोड़ी बहुत बचत करके जमा पूंजी  इकट्ठा की थी उससे मैंने 

यह प्याऊ बनवाई है मुझे बहुत तकलीफ होती थी जब मैं देखता था कि लोग गर्मी में प्यासे बेहाल होकर पानी ढूंढते फिरते थे और यहां पानी पीने के लिए कोई साधन नहीं था इसलिए मैंने और मेरे परिवार ने यह निश्चय 

लिया कि हम एक समय ही भोजन करेंगे इस तरह हमने कुछ धन इकट्ठा कर लिया और उसी  धन से यह प्याऊ बनवाई है जब कोई यात्री यहां से निकलता है और पानी पीता है तो यह देख  मुझे बहुत शांति महसूस 

होती है घासी की भोली-भाली बातें सुनकर यात्री द्रवित हो गया उसने सोचा कि जब यह निर्धन गरीब व्यक्ति जिसने घास काट काटकर एक-एक पैसा जमा करके इतना अच्छा कार्य किया है और यह लोक कल्याण के लिए इतना सोचता है फिर मैं तो उसके मुकाबले काफी  संपत्तिवान हूं, धनवान हूं तो फिर मैं घासी जैसा क्यों नहीं सोचता ?उसी क्षण यात्री ने एक ठोस 

निर्णय लिया अब मैं अपना जीवन अपनी धन-संपत्ति दूसरों की भलाई के लिए लगाऊंगा और जन  जनकल्याण के लिए कुछ अच्छा कार्य करूंगा इस यात्री ने आगे चलकर लोगों 

की सुविधा के लिए जगह जगह पर  प्याऊ लगाएं ,भंडारों का आयोजन किया, नई नई सड़के बनवाई, 
तालाब खुदवाए, कुए बनवाए इस प्रकार से उसने अनेक परमारथ के काम किए यही यात्री आगे चलकर 

भानुभक्त के नाम से प्रसिद्ध हुआ जो कि नेपाल देश में रहता था वास्तव में ज्ञान और चेतना जागृत होने के लिए एक क्षण काफी है स कोई बात मन मैं बैठ जाए तो व्यक्ति का संपूर्ण जीवन परिवर्तित हो जाता है 

ऐसी दृष्टांत सुनकर प्रत्येक व्यक्ति की भावना जागृत होती है और इसके माध्यम से हमें जीवन में आगे बढ़ने में प्रेरणा मिलती मिलती है जिससे हमारा जीवन उदारवादी बनता है वास्तव में यह मानवता का एक श्रेष्ठ 


उदाहरण है वास्तव में जब हम किसी की छोटी से छोटी की सहायता करते हैं तो हमारा मन प्रसन्नता से भर जाता है क्योंकि हमारी छोटी सी सहायता से अगर किसी का भला हो सकता है तो हमें ऐसी मानव सेवा करने 

में आनंद का अनुभव होता है यही तो जीवन का सार हैऐसी सेवा से यह लोक और परलोक दोनों सुधर जाते हैं



post by  - योगी चिंतन (yogi chintan)
Email:-harikantprashant@gmail.com

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