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सिद्धिया सुपात्र को मिलती है कुपात्र को नहीं

Choosing the sadhu life was — and still is — about the only ...


सुपात्र व कुपात्र क्या है ?
ईश्वर ज्ञान और सिद्धियों को सुपात्र को देता है कुपात्र को नहीं इसी संबंध में एक घटना मुझे याद आती है एक 
सन्यासी के पास बहुत सिद्धियां थी जिन सिद्धियों से प्रभावित होकर एक महिला उस संयासी के पास गई और 



उनसे कहा कि मुझे भी कोई ऐसा रास्ता बताएं जिससे मैं सिद्धिया प्राप्त कर सकू , संयासी ने उसे पूजा पाठ साधना उपासना मंत्र जप सभी चीजों के बारे में विस्तार से समझाया और साधना करने की ओर प्रेरित किया वह महिला रोज साधना करने लगी साधना करते हुए जब उसे काफी समय व्यतीत हो गया लेकिन उसे कुछ भी अनुभव प्राप्त नहीं हुआ और ना ही किसी प्रकार की सिद्धि प्राप्त हुई तब उसने सन्यासीi के पास आकर बोला, देव !भगवान भी बहुत पक्षपाती है वह किसी किसी को तो बहुत सारी सिद्धिया दे देता है और उसको बहुत बड़ा स्वामी बना देता है और किसी किसी को साधना करने के बाद में भी कुछ भी नहीं देता उसकी बातों को सुनकर सन्यासी मुस्कुराए और बोले, ऐसी बात नहीं है भगवान सत पात्रों को ही सिद्धियां प्रदान करते हैं तब उस महिला ने कहा जब पात्रता का विकास कर के ही कोई उन सिद्धियों को प्राप्त कर सकता है तब साधना तपस्या करने की आवश्यकता ही क्या है?  इसमें भगवान की विशेषता ही क्या रही, उसे तो सबको एक समान रुप से अनुदान देना चाहिए, वह सन्यासी उस महिला की बातें सुनकर चुप बने रहे लेकिन दूसरे दिन उन्होंने गांव के एक मूर्ख व्यक्ति से कहा गांव की अमुक नाम की महिला से सोने के आभूषण  मांग कर ले आओ उस  मूर्ख व्यक्ति ने गांव पहुंचकर उस महिला से आभूषण मांगे उस महिला ने उस व्यक्ति कोडाटा और कहा कि मैं अपने आभूषण तुम्हें क्यों दूं तुम्हें आभूषणों की क्या आवश्यकता है? मूर्ख व्यक्ति से कोई जवाब नहीं बना तब उस महिला ने उसे डांट कर वहां से भगा दिया जब वह सन्यासी के पास पहुंचा और सारी घटना बताई तो वह सन्यासी थोड़ी देर के बाद स्वयं उस महिला के पास पहुंचे और बोले आप 1 दिन के लिए अपने आभूषण मुझे दे दें आवश्यक काम करके आपको लौटा दूंगा संयासी की बातें सुनकर उस महिला ने कोई प्रश्न पूछे बिना अपना संदूक खोला और सारे कीमती आभूषण उन सन्यासी को दे दिए और कहा ,आप पर मुझे पूर्ण विश्वास है निश्चय ही आप किसी श्रेष्ठ कार्य के लिए इन आभूषणों का उपयोग करेंगे तब वह सन्यासी वापस अपने आश्रम लौट आए तब जिस महिला ने साधना की थी उसने सन्यासी से पूछा, उस मूर्ख को गांव की महिला ने आभूषण नहीं दिए थे और आपके कहने से उसने तुरंत आपको आभूषण देखें ऐसा उसने क्यों किया? तब सन्यासी बोले कोई भी सामान्य व्यक्ति बिना सोचे विचारे इतने कीमती आभूषण कुपात्र को कैसे देता और जब उसे मुझ पर पूरा भरोसा था तब  उस महिला ने मुझे कीमती आभूषण किसी अच्छे कार्य में लगाने के लिए दे दिए साथ ही उन क्योंकि तुम्हारी साधना में कई प्रकार की कमियां शेष थी तुम्हें वापस मेरे पास आकर इन कमियों को दूर करना चाहिए था सन्यासी ने कहा, इसी प्रकार तुमने भी 6 महीने तक साधना तपस्या की थी लेकिन किसी प्रकार की सिद्धि प्राप्त ना हो सकी लेकिन तुमने ऐसा नहीं किया, इसलिए तुम्हें सिद्धि की प्राप्ति नहीं हो सकी , इसी प्रकार परमात्मा  अपनी सिद्धिया कुपात्र को नहीं देता  क्योंकि कुपात्र उन सिद्धियों का गलत इस्तेमाल कर सकता है इसलिए ईश्वर भी पात्रता को देखते हुए सिद्धि प्रदान करते हैं अतः सिद्धियां सुपात्र को प्राप्त होती हैं, कुपात्र को नहीं महात्मा की सीख  को प्राप्त कर  उस महिला ने आगे साधना जारी रखी और आगे चल कर उसे कई सिद्धियां प्राप्त हुई अब वह महिला समझ चुकी थी  कि सिद्धियां सुपात्र को क्यों और किस प्रकार प्राप्त होती है| 

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