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atm vikas कर्मयोग का तुलनात्मक विश्लेषण


atm vikas
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आजकल व्यक्ति हर समय किसी ना किसी कार्य को करने में लगा रहता है उसके पास अपने atm vikas व आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए समय नहीं है वह TV के सामने बैठकर घंटो प्रोग्राम देखता रहता है लेकिन अपने स्वयं के  लिए समय नहीं है  अपने मन से बात करने के लिए और  
अपनी अंतरात्मा से बात करने के लिए उसके पास समय नहीं है इसीलिए तो आज का मनुष्य अत्यधिक तनाव में जीवन व्यतीत करता है अपने आत्म विकास के लिए ध्यान को अपनाना बहुत जरुरी है इसके लिए हमें अपने आपके विचारों पर चिंतन मनन करना चाहिए इस प्रकृति के 

क्रियाकलापों को ध्यान से देखना और समझना चाहिए क्या आप कभी नदी के पास बैठे हैं शांत भाव से नदी की ओर निहारने पर उसकी कल-कल करती हुई आवाज मे से आपको एक संगीत सुनाई देगा जिससे कि एक अद्वितीय वातावरण की अनुभूति होती है कभी बगीचे में जाकर  फूलों के 
बीच बैठकर देखिए आपको महसूस होगा कि वह आपको आकृष्ट करते हुए आप से बातें कर रहे हैं और अपनी भीनी भीनी सुगंध के माध्यम से मनुष्य के तन और मन को आनंदित कर रहे हैं जब आप एकांत में अपने आप से अपने मन से बात करते हैं उस समय आप की अंतरात्मा आपके  उन सभी  
सवालों का जवाब देती है|

अपने मन की आँखे खोले 
 जिन्हें आप बाहर ढूंढ रहे हैं आप अपने मन के भीतर बैठे ज्ञान गुरु से उस समय साक्षात्कार प्राप्त करते हैं वह आपका बड़ा ही प्यारा मित्र है जो हर समय आपको atm vikas के लिए निरंतर प्रेरित करता रहता है श्रीमद भगवत गीता में मानव के आत्म विकास के लिए चार विकल्प बताए  
गए हैं जो कि योग साधनाओं के रूप में है मनुष्य अपनी इच्छा के अनुसार उन चारों मार्गों में से किसी एक मार्ग का अनुसरण करके अपना मार्ग चुन सकता है सबसे पहला मार्ग कर्म योग साधना को अपने जीवन का रास्ता बना सकते हैं दूसरा मार्ग भक्ति मार्ग को अपनाकर  श्रद्धावान  बनना है |
बनते हुए इस मार्ग का अनुसरण कर सकते हैं तीसरा मार्ग राजयोग साधना है जिसे तर्कवादी लोग तर्क करते हुए कर्म के द्वारा इस राजयोग मार्ग को अपनाते हैं चौथा मार्ग योगी, सन्यासी तथा दार्शनिक साधक ज्ञान योग से ही इस मार्ग पर अग्रसर होते हैं इन सारी बातों का सारांश यह है कि इस 

प्रकार से जो भी व्यक्ति अपने जीवन का atm vikas करता है वह विश्व में कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अवश्य ही सफलता प्राप्त करता है आज हम प्रत्यक्ष देख सकते हैं कि भारत वर्ष के लोग विदेशों में जाकर अत्यधिक सफल होते हैं |

किसी एक मार्ग का अनुसरण करे 
सबसे बड़ा कारण है यहां पर सबसे पहले माता पिता और उसके बाद समाज के माध्यम से भी उपरोक्त चारों चीजों का ज्ञान संतो के प्रवचन और मां-बाप द्वारा दिए गए संस्कार आध्यात्मिक विचारों से परिपूर्ण बनाता हैं जिसमें कर्मयोग, भक्ति योग, राजयोग  और ज्ञान  का समावेश होता है 

इसीलिए तो भारत के विद्यार्थी विदेशों में जाकर अत्यंत सफल होते हैं विदेशी छात्र भी भारतीय छात्रों का मुकाबला नहीं कर पाते क्योंकि उनके पास उपरोक्त चारों चीजों का अभाव होता है भारतीय सैनिक भी अन्य देशों के सैनिकों के मुकाबले अत्यंत कठिन परिस्थितियों को झेलने में सक्षम हो 

पाते हैं इसके पीछे हमारे पूर्वजों के अनेक संस्कार और उनकी सीखें कार्य करती हैं आप भारत वर्ष के वाहन चालकों को ही देख लीजिए वह विदेशों में बड़ी ही आसानी के साथ गाड़ी चला सकते हैं लेकिन एक विदेशी चालक अत्याधुनिक कार को अपने देश से बाहर नहीं चला सकता इस प्रकार की 
क्रिया में भारतीय व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक क्षमता उसके मस्तिष्क के atm vikas में छुपी हुई है जो उसे सभी परिस्थितियों का सामना करने का हौसला देती है इस प्रकार की गुणवत्ता आधुनिक तकनीक से नहीं बल्कि इसका श्रेय भारत के उन मूल्यों को जाता है जो किसी भी 

व्यक्ति को हर कठिन परिस्थिति का सामना करने के लिए उत्साहित करती है इसीलिए तो भारतीय व्यक्तित्व और उसकी विकास पद्धति, अग्नि परीक्षा में पूर्ण रुप से सफल होती है |

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