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लोकप्रिय कैसे बने

लोकप्रिय
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व्यक्ति को बिना संकोच किए हुए खुलकर बात करनी चाहिए हंसते हुए मुस्कुराते हुए अपना हृदय सबके सामने खोलकर बात करनी चाहिए यदि हमारे व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण है तो हमारे लोकप्रिय होने में देर नहीं लगेगी कुछ लोग ऐसा समझते हैं की लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए 

व्यक्ति को छल, झूठ, कपट,  कूटनीति, राजनीति आवश्यक होती है लेकिन इस बात को कोई स्वीकार नहीं करता, मेरा तो यह मत है लोकप्रिय होने के लिए जो गुण अनिवार्य होते हैं वह है हृदय की सच्चाई और ईमानदारीइस गुण के सामने दूसरी कोई खूबी स्थान नहीं ले सकती हमें कोई बहाना या 

दिखावा नहीं करना चाहिए बल्कि उसके कार्य में रुचि लेनी चाहिए वास्तव में दूसरों में सच्चाई से रुचि लेना आसान है क्योंकि दूसरों के बारे में जानकारी प्राप्त करने से और उनकी रुचि को जानना, उनके शौक व उनकी खुशियों की  वस्तुओं को जानना अधिक आसान होता है दूसरों को प्रभावित 
करने के लिए उनमें रुचि लेना या सहानुभूति जाहिर करना आसान है | बहाना, छल, दिखावा आदि वस्तु अंत में घातक ही सिद्ध होती है आप जिस किसी व्यक्ति से मिलते हैं वह आपसे सच्चाई, ईमानदारी, सहृदयता एवं सद्व्यवहार की आशा करते हैं यदि उन्हें पता चल जाए कि आप इन बातों 

का केवल दिखावा या अभिनय कर रहे हैं अथवा आप उन्हें छलने का प्रयत्न कर रहे हैं तो वह आपके प्रति स्नेह तथा आदर का भाव नहीं रखेंगे इसलिए आपको उनके प्रति विश्वास सद्भावना स्नेह एवं मैत्री की नींव रखते हुए निर्माण करना चाहिए बेवकूफ कोई नहीं बनना चाहता और कोई यह भी   
नहीं चाहता कि कोई उसे मूर्ख बनाए जैसे कि स्वार्थी राजनीतिज्ञ मीठी मीठी बातें बना कर मतदाताओं के वोट ले लेते हैं इसीलिए हमें एक दूसरे से पूरी सच्चाई ईमानदारी असलियत और मैत्रीभाव अपनाते हुए हृदय से पूर्ण सम्मान करना चाहिए जैसा कि हम उनसे आशा करते हैं या उसे चाहते हैं 

श्रोता बनना सीखे 
यदि आप अपने चेहरे पर मुखोटा लगाकर रखते हैं तब उन लोगों की दृष्टि शीघ्र ही उस मुखोटे के पीछे इस  सत्य को जान लेगी यदि आप ऐसा सोचते हैं कि लोग आप में रुचि ले तो आपको भी उन में रुचि लेने होगी इसके लिए दूसरे की बात को ध्यान से सुनने की कला  आनी चाहिए जब 

दूसरे व्यक्ति को यह पता चलता है कि आप उनकी बातों को बड़े ही गौर से सुन रहे हैं तो इससे उसे अपार प्रसन्नता होती है श्रेष्ठ वार्तालाप स्थापित करने के लिए आपको एक अच्छा श्रोता बनना सबसे अच्छा गुण  है लेकिन आप उपेक्षा दिखाते हैं या लापरवाही से दूसरे की बात को सुनते हैं या 

सुनकर भी उनकी बात को अनसुनी कर जाते हैं या अपनी आंखें दूसरी ओर फेर लेते हैं और ऐसा प्रकट करते हैं कि आप उकता रहे हैं या तंग आ गए हैं तो बोलने वाला व्यक्ति भी आप में रुचि लेना छोड़ देता है अतः यह बात आवश्यक नहीं क्या आप लोकप्रिय  बनने के लिए वार्तालाप में अत्यधिक 
कुशल ही हो या फिर आप एक अच्छे वक्ता हो इसके लिए आपके मन की भावना शुद्ध हो, मन में प्रेम हो तो सामने वाला व्यक्ति सब कुछ समझ जाता है इसके माध्यम से भी आप लोकप्रियता प्राप्त कर सकते हैं यदि आप अपने मन में यह निश्चय कर लें कि आप जिस से भी मिले उससे 

उसकी रुचि की बात करें तो आप यह जानकर चकित रह जाएंगे कि  उससे कितनी आसानी से बातचीत करने में समर्थ होते हैं और अपनी बात उसके हृदय तक आसानी से पहुंचा सकते हैं व्यंग कसने वाले लोग ज्यादातर आश्चर्य करते हैं कि वो लोकप्रिय क्यों नहीं होते और क्यों लोग उनसे दूर 

रहने का प्रयास करते हैं? परंतु इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं होती ऐसे व्यक्ति से सभी दूर रहना पसंद करते हैं प्रत्येक व्यक्ति सूर्य के प्रकाश में जाना पसंद करता है और प्रसन्नता जीवन का आवश्यक अंग है जिस प्रकार व्यक्ति अंधकार को पसंद नहीं करते उसी प्रकार से धूर्त व्यक्ति को भी 

कोई पसंद नहीं करता अगर हम अपने चेहरे पर प्रसन्नता बनाए रखते हैं तो आपकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आएगी केवल रचनात्मक एवं भावनात्मक गुणों के द्वारा ही आप दूसरों को प्रेम करते हुए आकर्षित कर सकते हैं चिंता, निरुत्साह, पछतावा ऐसी वृत्तियां होती हैं जो हर समय और  
गुणों का विकास करे 
हर जगह लोकप्रियता के लिए घातक होती है स्वार्थीपन के सभी रूप, सभी नकारात्मक भाव, घृणा, जलन और ईर्ष्या ऐसे दोष होते हैं जिससे लोग आपसे दूर भागते हैं इसके विपरीत आप में स्नेह, प्रेम, दया, उदारता, मधुरता, परोपकार और सुंदरता स्वच्छता अनेक ऐसे गुण हैं जो लोगों को 

आपकी और आकर्षित करते हैं जैसे कोई चुंबक लोहे को अपनी ओर खींच लेती है उसी प्रकार यह गुण भी अपना कार्य करते हैं लोकप्रियता बनाए रखने के लिए सदगुणों  को हमें अपने जीवन में अवश्य स्थान देना चाहिए आपको सभी लोग सम्मान की दृष्टि से देख सकें हमारे जीवन का प्रत्येक 

क्षण सार्थक, सत्य से परिपूर्ण, सुंदरता लिए हुए श्रेष्ठ बनने की ओर अग्रसर होना चाहिए यह मानव जीवन अनेक पुण्य कर्मों के बाद प्राप्त होता है इसीलिए हम सब अत्यंत भाग्यशाली हैं क्योंकि मनुष्य जीवन में ही आध्यात्मिकता और भौतिकता के सम्मिलन  से एक श्रेष्ठता, पूर्णता  प्राप्त 
की जा सकती है इन सब के प्रभाव से मनुष्य जीवन में एक आनंद की अनुभूति प्राप्त होती है और आनंद ईश्वरी सत्ता का मूलभूत तत्व है इसके अभाव में मानव का जीवन नीरस हो जाता है उसके जीवन में आनंद की कोई अनुभूति नहीं होती और वह अपने आप को खाली खाली सा महसूस 

करता है संपूर्ण जीवन का आधार आध्यात्मिकता और प्रेम है इसीलिए तो देवता भी  मनुष्य का जन्म लेने के लिए तरसते हैं क्योंकि मनुष्य जीवन में ऐसी क्रियाएं होती है जिसके माध्यम से देवताओं से भी उच्चकोटि के स्तर पर पंहुचा जा सकता है इसी को शास्त्रों में ब्रह्म का साक्षात्कार कहा 

गया है जिससे कि मानव जीवन अपने आप में धन्य हो जाता है एक आत्मा का परमात्मा में मिलन   हो जाता है एक तुच्छ और नगण्य व्यक्ति सर्वज्ञता को प्राप्त कर लेता है अतः मानव जीवन बहुत बहुमूल्य वस्तु है इस जीवन की सार्थकता को प्राप्त करने के लिए ऐसे संत और 

महात्मा की खोज करनी चाहिए जिसका अहंकार पूर्ण रुप से समाप्त हो चुका हो जिसका ज्ञान पर्वत से भी ऊंचा हो और जिसने ईश्वर का साक्षात्कार किया हो और ढोंग व पाखंड से अत्यंत दूर हो ऐसे संत की शरण में जाने से ही मानव जीवन का भला हो सकता है ऐसे संत की खोज  
कोई आसान काम नहीं है और जब ऐसे योगी, संत, महात्मा किसी को प्राप्त हो जाते हैं तब उसे ईश्वर साक्षात्कार में ज्यादा देर नहीं लगती | ऐसा व्यक्तित्व लोकप्रिय होते हुए विश्व को भी लाभ पहुचाता है |
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