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श्राद्ध कर्म कैसे करें


shradh karm
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सभी के मन में यह प्रश्न आता है shradh karm श्राद्ध कर्म किस विधि से करें जिससे कि उनके पितर प्रसन्न होकर समस्त दुखों और परेशानियों को समाप्त करते हुए धन-संपत्ति आयुक्त आयु प्रदान करें जिसके  प्रभाव से व्यक्ति का जीवन सभी प्रकार से आनंदमय और प्रसन्न व खुशहाल हो, व्यक्ति के सामने यदि किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न होती है तो उसे चाहिए कि वह अपने पितरों के अधिष्ठाता वसुगण को पित्र स्वरूप मानकर उनका पूजन श्रद्धा के साथ संपन्न करें जो मनुष्य अपने पितरों को श्राद्ध के दिनों में shradh karm श्रद्धा पूर्वक जल प्रदान करता है उस पर वसु, रूद्र, आदित्य, पितर  आदिदेव प्रसन्न होते हैं और उस व्यक्ति को आयु पुत्र, पौत्र, विद्या, धन, स्वर्ग, मोक्ष एवं सभी सुख प्रदान करते हैं पुराणों में 33 करोड़ देवी देवताओं का समूह है विशेष समूह इंद्र आदित्य अग्नि के साथ ही वसुओं की स्तुति की जाती है यह तीन स्थानों पर निवास करते हैं प्रथ्वी, अंतरिक्ष और धूस्थानीय इनकी उत्पत्ति के विषय में पुराणों में एक जगह वर्णन आया है कि दक्ष ने अपनी 10 कन्याओं का विवाह धर्म के साथ कर दिया उनमें से वसु कन्या के गर्भ से उत्पन्न होने के कारण उनकी संतान वसु  के नाम से प्रसिद्द हुई वसु के 8 पुत्र होने के कारण उन्हें अष्टवसु कहां गया शास्त्र के अनुसार उनके नाम इस प्रकार हैं द्रोण, प्राण, ध्रुव, अग्नि, दोष, अर्क,  वसु, और  विभवास |

श्राद्धकर्म से सफलता की प्राप्ति 
भारतवर्ष के प्रसिद्ध ग्रंथ श्रीमद् भागवत के अनुसार वसु देवताओं की उपासना आराधना करने से पूर्णता  की प्राप्ति होती है क्योंकि यह धर्म के पुत्र माने गए हैं इसलिए इन्हें धर्म के रूप में पूजा जाता है यदि व्यक्ति shradh karm श्राद्धकर्म करते समय इन वसुओ  का भी पूजन करें और तर्पण करें तो धन संपत्ति आदि और सभी शुभ आनंद प्राप्त होता है समस्त पितरो के प्रति उनके पूजन करने से पितृ कर्म का फल भी शीघ्र प्राप्त होता है यदि किसी कारण पितरों को मुक्ति नहीं मिल पाती तो इस विधि से तर्पण करने से वह  मुक्त हो जाते हैं और व्यक्ति को आशीर्वाद देते हैं पित्रगण  shradh karm श्राद्ध कर्म की प्रतीक्षा करते रहते हैं जब हम वंश के लोग उन्हें सम्मान देते हुए तर्पण आदि करें तब उस समय मन में ऐसी भावना रखनी चाहिए कि किसी कारणवश मेरे कुल के मेरे बंधु-बांधव और कई पीढ़ी पहले के बंधु-बांधव कष्ट या यातना अवस्था में होकर भटक रहे हो तो मेरे द्वारा किए गए तर्पण से खुश होकर सुखी हो जाए इस प्रकार की भावना से जब कोई व्यक्ति पित्र दान करता है तब उस व्यक्ति को तथा उसके समस्त कुल को शांति प्राप्त होती है और श्राद्धकर्ता की इस भावना से प्रसन्न होकर पितरगण उस व्यक्ति को जीवन पर्यंत सफलता प्रदान करते हुए पूर्ण शुभ की कामना करते हैं जिसके फलस्वरुप व्यक्ति के सभी रुके हुए कार्य दोबारा से शीघ्र गति से शुरु हो जाते हैं और उसे अपने जीवन में निरंतर उच्चता की ओर अग्रसर करते हुए उच्च कोटि की सफलता प्राप्त करा कराते हैं पितरो को जल तर्पण करते हुए जल तर्पण दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे के बीच करना ज्यादा उचित रहता है क्योंकि इस समय उनके लोक  के द्वारा खुले होते हैं और उन्हें तर्पण किया हुआ जल पूर्णता के साथ प्राप्त होता है अगर व्यक्ति के जीवन में धन का अभाव हो और वह shradh karm श्राद्ध कर्म करने में असमर्थ हो ऐसी स्थिति में उसे किसी गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए या कुत्ते को भोजन कराये  या कौवों को भोजन डालने से या खिलाने से भी श्राद्धकर्म पूर्ण होता है और उसे अपने जीवन में उन्नति प्राप्त होती है |

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